Wednesday, October 21st, 2026

जोधपुर: 11 शरणार्थियों की मौत पर पाकिस्तान की 'गिद्ध दृष्टि', UNHRC में उठाएगा मुद्दा

इस्लामाबाद
राजस्थान के जोधपुर मे पिछले साल 11 पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की मौत के मामले को पाकिस्तान अब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में उठाने की तैयारी कर रहा है। इन शरणार्थियों का शव पिछले साल अगस्त में जोधपुर के एक खेत में पाया गया था। पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के प्रमुख और इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के सदस्य रमेश कुमार वांकवानी ने आरोप लगाते हुए कहा कि भारत ने दुर्घटना वाली जगह पर पाकिस्तान की पहुंच को रोका था। उन्होंने अब इस मामले को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की आगामी बैठक में उठाने का ऐलान किया है।

साल भर बाद पाकिस्तान को याद आए शरणार्थी
रमेश कुमार वांकवानी आरोप लगाया कि भारत ने हमारे उच्चायोग के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उनको अपराध स्थल पर जाने की अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हमें इस घटना के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है क्योंकि मरे हुए सभी नागरिक पाकिस्तानी पासपोर्ट धारक थे। हालांकि, वांकवानी ने यह नहीं बताया कि जब उनके देश में अल्पसंख्यकों की इतनी चिंता की जाती है तो वहां से हर साल सैकड़ों की संख्या में हिंदू शरणार्थी भारत में शरण लेने क्यों पहुंचते हैं?

यूएनएचआरसी में मामला उठाएगा पाकिस्तान
इमरान खान की पार्टी के इस नेता ने कहा कि हमारे ऊपर मृतकों के परिवारों का भारी दबाव है। इसलिए हमारी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का दरवाजा खटखटाया है। हम 21 जून और 9 जुलाई के बीच होने वाले यूएनएचआरसी के सत्र में इस मुद्दे को उठाएंगे। पाकिस्तानी विधायक ने यह भी कहा कि उनके देश में जोधपुर में मृतक शरणार्थियों के परिवारीजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए शिकायत भी दर्ज करवाई है।

पुलिस ने बाहरी पक्ष की भूमिका से किया था इनकार
बता दें कि जोधपुर पुलिस ने इस मामले की जांच में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका से इनकार किया था। उस समय जोधपुर में तैनात पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राहुल बारहट ने बताया था कि इन सभी लोगों ने किसी जहर को पीया था, जिससे इनकी मौत हो गई थी। ये लोग पाकिस्तान के भील समुदाय से जुड़े हुए थे जिन्होंने 2012 में भारत आने के बाद एक खेत किराए पर लिया था। उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जा रही है कि यह खुदकुशी है या कुछ और मामला है। एसपी ने कहा, 'हम अभी यह बताने की स्थिति में नहीं है कि यह खुदकुशी थी, दुर्घटनावश हुई मौत या कुछ और। हमने शवों को चिकित्सा बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करेंगे।' उन्होंने कहा कि कीटनाशक का आधा इस्तेमाल हुआ कनस्तर और कुछ शीशियां झोपड़ी से बरामद हुई हैं। पुलिस को मौके से एक नोट भी मिला है और लिखावट का सत्यापन किया जा रहा है। भील समुदाय से जुड़े परिवार के सभी सदस्य पाकिस्तान के हिंदू शरणार्थी थे और गांव में खेत में रह रहे थे जिसे उन्होंने खेतीबाड़ी के लिए छह महीने पहले बटाई पर लिया था। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के रहने वाले ये लोग दीर्घकालिक वीजा पर 2015 में यहां आए थे और तभी से यहां रह रहे थे।

पुलिस अधीक्षक ने कहा, ‘किसी के भी शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं हैं और न ही किसी तरह की साजिश के सबूत हैं लेकिन हमने फॉरेंसिक टीम और श्वान दल बुलाया है।’ प्रारंभिक सूचना से पता चला है कि किसी मुद्दे को लेकर परिवार में विवाद था। उन्होंने कहा, ‘जीवित बचे व्यक्ति से पूछताछ करने के बाद ही हम इस घटना के बारे में कुछ कहने की स्थिति में होंगे।’ इस बीच परिवार के जीवित बचे सदस्य केवल राम (35) ने अपनी पत्नी के परिवार वालों के खिलाफ शिकायत देते हुए आरोप लगाया कि यह खुदकुशी का नहीं हत्या का मामला है। इसकी पुष्टि करते हुए एसपी ने कहा कि विवाद की वजह से बीते कुछ समय से उसकी पत्नी परिवार के साथ नहीं रह रही थी। उन्होंने कहा कि केवल राम की पत्नी कथित तौर पर बच्चों को अपने साथ रखने के लिये उस पर दबाव डाल रही थी। अधिकारी ने कहा कि इस मामले में खुद बच जाने और बयान बदलने की वजह से केवलराम भी संदिग्ध है। केवल राम के मुताबिक उन्होंने शनिवार रात नौ से 10 बजे के बीच खाना खाया और सोने चले गए। उसने बताया, 'मैं जानवरों से फसल की रखवाली के लिये चला गया और वहीं सो गया था।' सुबह जब वह लौटा तो परिवार के सभी सदस्यों को मृत पाया। घटना को लेकर अनभिज्ञता जाहिर करते हुए केवल राम ने कहा, 'मैंने फिर अपने रिश्तेदार को फोन किया जो कुछ अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंचा और पुलिस को सूचना दी।'

ससुराल में होने के कारण जिंदा बची केवलराम की बहन मलकादेवी का आरोप है कि पुलिस को उसकी नर्स बहन प्रिया की जेब से सुसाइड नोट मिला है। इसमें पुलिस पर प्रताड़ित करने का जिक्र है। मलका का आरोप है कि रक्षाबंधन पर लक्ष्मी को धांधली देवी ने प्रताड़ित किया तो वह मंडोर पुलिस थाने में शिकायत करने पहुंची। लेकिन पुलिस ने उल्टा उसे कैद कर लिया। मलका ने आरोप लगाया कि उसके 11 परिजनों में से 10 के हाथ व पैर पर इंजेक्शन लगाने के निशान हैं। केवलराम की पत्नी धांधलीदेवी और उसके भाई रवि की पत्नी तारीफां ने अपने-अपने पति के खिलाफ एफआईआर करवा चुकी हैं। कुछ दिन पहले धांधलीदेवी ने दोनों शादीशुदा ननदों मलका व लक्ष्मी को राजीनामे के लिए जोधपुर बुलाया था। दोनों रक्षाबंधन पर वहां पहुंची। जहां उनकी लड़ाई हो गई। मलका तो चली गई, लेकिन लक्ष्मी को धांधलीदेवी व उसके साथ रहने वाले चेतन भील ने बंधक बना लिया। दो दिन बाद केवलराम उसे छुड़ाकर गांव लाया था। आरोप है कि उस समय धांधली देवी ने पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी थी। लक्ष्मी की शादी पाकिस्तान में हुई थी। इसके बाद वह तो यहां आ गई, लेकिन पति पाकिस्तान में ही है। मृतकों की पहचान बुधराम (75), उनकी पत्नी अंतरा देवी, बेटे रवि (31), बेटी जिया (25) और सुमन (22), पौत्रों मुकदस (17) और नैन (12) के अलावा लक्ष्मी (40) और केवल राम के तीन नाबालिग बेटों के तौर पर हुई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिये जोधपुर भेजा गया है और मौत की वजह जानने के लिये चिकित्सा बोर्ड का गठन किया गया है।

इन लोगों की हुई थी मौत
पाकिस्तानी मीडिया ने मृतकों के नाम और उनकी उम्र के बारे में रिपोर्ट जारी की है। जिनके नाम बुद्ध राम (80), रायवी (35), शामून (25), अंतार (75), श्रीमती लक्ष्मी (39), श्रीमती देवी (28), मुकेश (16) ज़ैन (12) , दयाल (12), दानिश (10), और दीया (5) हैं।
 

 

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Source : Agency

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